विकास प्रस्तावों पर खर्च से पहले होगा लागत-लाभ विश्लेषण, मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देश

विकास प्रस्तावों पर खर्च से पहले होगा लागत-लाभ विश्लेषण, मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए निर्देशकोल्ड स्टोरेज संचालन में स्वयं सहायता समूहों को मिलेगी जिम्मेदारी, मोबाइल नेटवर्क विहीन क्षेत्रों का होगा सर्वेक्षण; त्यूणी अस्पताल 15 नवंबर तक शुरू करने के निर्देशदेहरादून। प्रदेश में विकास योजनाओं को अधिक उपयोगी, व्यावहारिक और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों के जिलाधिकारियों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ लंबित प्रकरणों और प्रस्तावों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन को भेजे जाने वाले प्रत्येक विकास प्रस्ताव की आवश्यकता, उपयोगिता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन अनिवार्य रूप से किया जाए।मुख्य सचिव ने कहा कि कई बार योजनाओं के प्रस्ताव तो तैयार कर शासन को भेज दिए जाते हैं, लेकिन उनके वास्तविक लाभ, संचालन की व्यवहारिकता और भविष्य में आने वाले खर्चों का समुचित आकलन नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति से बचने के लिए उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रस्ताव को शासन को भेजने से पहले उसका कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस (लागत-लाभ विश्लेषण) अनिवार्य रूप से कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रस्तावित योजना पर होने वाला खर्च कितना है और उससे आम जनता को कितना लाभ मिलेगा।स्वयं सहायता समूहों के हाथों में कोल्ड स्टोरेज संचालन की जिम्मेदारीबैठक में प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज के संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बेहतर कार्य कर रहे स्वयं सहायता समूहों को कोल्ड स्टोरेज संचालन की जिम्मेदारी देने की संभावनाओं पर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए समूहों को आवश्यक तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश में वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कोल्ड स्टोरेज की जरूरत का शीघ्र आकलन करने तथा इसके आधार पर नए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इस पहल से जहां स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों के भंडारण की सुविधा विकसित हो सकती है, वहीं स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।मोबाइल नेटवर्क विहीन क्षेत्रों की बनेगी सूची, हाईवे पर किलोमीटर के हिसाब से होगा सर्वेक्षणउत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में नेटवर्क विहीन क्षेत्रों (शैडो एरिया) का व्यापक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे स्थानों को चिह्नित कर उनकी विस्तृत सूची शासन को शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा।खास बात यह है कि राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर भी मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता का विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा। इसमें स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा कि राजमार्ग के किस किलोमीटर से किस किलोमीटर तक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।मुख्य सचिव ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को दूरसंचार विभाग (डीओटी) से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए। इसके आधार पर नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।पर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क स्थापित करना भी चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस सर्वेक्षण को प्रदेश की संचार व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।15 नवंबर तक शुरू होगा त्यूणी उप जिला अस्पतालस्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मुख्य सचिव ने जनपद देहरादून के त्यूणी उप जिला अस्पताल को 15 नवंबर तक अनिवार्य रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि अस्पताल के संचालन में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।इसके लिए चिकित्सकों की तैनाती, आवश्यक मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरण और अन्य आधारभूत सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि त्यूणी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें और उन्हें उपचार के लिए दूरस्थ क्षेत्रों की ओर न जाना पड़े।विद्यालयों में स्वच्छता और भवनों की मरम्मत पर रहेगा विशेष जोरशिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शौचालयों सहित पूरे परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।इसके लिए प्रधानाचार्यों को उपलब्ध कराए जाने वाले अनटाइड फंड में आवश्यकता के अनुसार वृद्धि किए जाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा गया। साथ ही विद्यालय भवनों की मरम्मत और नए भवनों के निर्माण से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूदबैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री अमित कुमार सिन्हा, श्री सहदेव सिंह, सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री नितेश कुमार झा, श्री दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, श्री बृजेश कुमार संत, डॉ. आर. राजेश कुमार, श्री विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. एस.एन. पाण्डेय, श्री विनोद कुमार सुमन, श्री दीपक कुमार, श्री श्रीधर बाबू अद्दांकी, श्री सी. रविशंकर, श्री युगल किशोर पंत, श्री रणवीर सिंह चौहान, डॉ. अहमद इकबाल, श्रीमती रंजना राजगुरु एवं श्री राजेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा गढ़वाल मंडल के आयुक्त श्री आनन्द स्वरूप, कुमाऊं मंडल के आयुक्त श्री दीपक रावत तथा विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।गढ़ देश न्यूज़ | देहरादून

देहरादून। प्रदेश में विकास योजनाओं को अधिक उपयोगी, व्यावहारिक और जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों के जिलाधिकारियों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ लंबित प्रकरणों और प्रस्तावों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन को भेजे जाने वाले प्रत्येक विकास प्रस्ताव की आवश्यकता, उपयोगिता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन अनिवार्य रूप से किया जाए।मुख्य सचिव ने कहा कि कई बार योजनाओं के प्रस्ताव तो तैयार कर शासन को भेज दिए जाते हैं, लेकिन उनके वास्तविक लाभ, संचालन की व्यवहारिकता और भविष्य में आने वाले खर्चों का समुचित आकलन नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति से बचने के लिए उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रस्ताव को शासन को भेजने से पहले उसका कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस (लागत-लाभ विश्लेषण) अनिवार्य रूप से कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रस्तावित योजना पर होने वाला खर्च कितना है और उससे आम जनता को कितना लाभ मिलेगा।

स्वयं सहायता समूहों के हाथों में कोल्ड स्टोरेज संचालन की जिम्मेदारीबैठक में प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज के संचालन से जुड़ीपर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क स्थापित करना भी चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस सर्वेक्षण को प्रदेश की संचार व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।15 नवंबर तक शुरू होगा त्यूणी उप जिला अस्पतालस्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मुख्य सचिव ने जनपद देहरादून के त्यूणी उप जिला अस्पताल को 15 नवंबर तक अनिवार्य रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि अस्पताल के संचालन में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।इसके लिए चिकित्सकों की तैनाती, आवश्यक मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरण और अन्य आधारभूत सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि त्यूणी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें और उन्हें उपचार के लिए दूरस्थ क्षेत्रों की ओर न जाना पड़े।

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