देहरादून, 1 जून 2026
उत्तराखंड शासन ने राज्य के सभी विभागों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत द्वारा जारी आदेश में स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, मानवीय और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया गया है।जारी शासनादेश के अनुसार अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण और निर्देश दिए गए हैं।
गंभीर बीमारी और विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को राहतशासन ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 17(1) के अंतर्गत गंभीर रूप से बीमार अथवा दिव्यांग कर्मचारियों के साथ-साथ उनके पति-पत्नी, माता-पिता, सास-ससुर तथा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की गंभीर बीमारी या अक्षमता के आधार पर भी स्थानांतरण अनुरोधों पर विचार किया जाएगा।इसके अलावा सैनिक एवं अर्धसैनिक बलों में तैनात कर्मचारियों के पति या पत्नी के मामलों में भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उपयुक्त स्थान पर तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।दुर्गम से सुगम स्थानांतरण पर नई व्यवस्था15 अप्रैल 2025 के शासनादेश में संशोधन करते हुए शासन ने कहा है
कि यदि किसी कर्मचारी का स्थानांतरण दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में किया जाता है और उसके स्थान पर तत्काल प्रतिनियुक्ति उपलब्ध नहीं है, तो विभागीय कार्य प्रभावित न हो इसके लिए संबंधित कर्मचारी को कार्यमुक्त (Relieve) करने की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी।शासन का मानना है कि इससे स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक सुचारू और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो सकेगी।गृह जनपद की परिभाषा भी स्पष्टअधिनियम की धारा 17(2)(ख) के संबंध में शासन ने स्पष्ट किया है कि समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ के कर्मचारियों को गृह जनपद में तैनाती संबंधी प्रावधान लागू होंगे।
इसके लिए कर्मचारी के मूल निवास वाले गांव, हल्का या तहसील को गृह स्थान माना जाएगा।विशेष मामलों में मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्ययदि कोई विभाग अपनी विशेष परिस्थितियों के कारण स्थानांतरण अधिनियम के किसी प्रावधान में परिवर्तन, छूट या विचलन चाहता है, तो उसका प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष रखा जाएगा। समिति की संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने पर ही किसी प्रकार की छूट या संशोधन प्रभावी होगा।
सभी विभागों को अनुपालन के निर्देशशासन ने सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानांतरण अधिनियम-2017 के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें तथा नवीन दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।यह आदेश अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया है तथा इसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय और सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को भी भेजी गई है।मुख्य बिंदु एक नजर में:गंभीर बीमारी और दिव्यांगता के मामलों में स्थानांतरण में प्राथमिकता।सैनिक एवं अर्धसैनिक बल कर्मियों के परिवारों को विशेष राहत।
दुर्गम से सुगम स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश।
समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ कर्मचारियों के गृह जनपद संबंधी प्रावधान स्पष्ट।विशेष छूट के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक।सभी विभागों को अधिनियम का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश।
