प्रधान संगठन की बैठक में क्षेत्र के प्रधानों ने कहा कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में पुरोला विकासखंड की 45 ग्राम सभाओं के प्रधानों ने भाग लेते हुए विभिन्न योजनाओं में आ रही बाधाओं पर गंभीर चर्चा की। प्रधान संगठन अध्यक्ष त्रिलोक बिजल्वाण ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का सुचारू संचालन नेटवर्क व्यवस्था, ऑनलाइन प्रणाली और तकनीकी समस्याओं के कारण प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होगा,
तब तक योजनाओं का लाभ आम ग्रामीणों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाएगा।फेस ऐप प्रणाली और ऑनलाइन प्रक्रियाओं का विरोधबैठक में जी-रामजी योजना में लागू फेस ऐप प्रणाली का विरोध किया गया।
प्रधानों का कहना था कि दूरस्थ गांवों में नेटवर्क की समस्या के कारण फेस ऐप आधारित उपस्थिति और सत्यापन प्रणाली व्यवहारिक नहीं है। इसके अलावा वित्तीय योजनाओं के पूर्ण रूप से ऑनलाइन संचालन पर भी नाराजगी व्यक्त की गई।प्रधानों ने मनरेगा श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति, डिलीट जॉब कार्ड की समस्या और तकनीकी खामियों को लेकर भी चिंता जताई।
उनका कहना था कि इन समस्याओं के कारण मजदूरों और ग्रामीणों को समय पर भुगतान एवं योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।प्रधान संगठन ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बैठक में आगे की रणनीति और प्रशासन के समक्ष मांगों को मजबूती से रखने पर भी मंथन किया गया।
बैठक में बलवंत सिंह, सुनील राणा, आशीष बेदी, कुलवंती, जगदीश, प्रदीप, बृजमोहन चौहान, गंभीर सिंह चौहान, पवन सिंह, बबीता, जयवीर, विजय गैरोला, किरण, सुरपाल, महेंद्र, शशिभूषण, जयपाल, भारती सहित विभिन्न ग्राम सभाओं के प्रधान उपस्थित रहे।इस अवसर पर प्रधान संगठन अध्यक्ष त्रिलोक बिजल्वाण, उपाध्यक्ष गुड्डी देवी, संयोजक बलवंत सिंह और किशन सिंह रावत ने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
