कढ देश न्यूज़
देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिनी जाने वाली NEET परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर के लाखों छात्रों और
अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है।बताया जा रहा है कि वर्ष 2018 से 2026 तक देश में विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं के लगभग 89 पेपर लीक होने के मामले सामने आ चुके हैं।
इनमें NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी शामिल है, जिस पर हर वर्ष लाखों छात्रों का भविष्य निर्भर करता है।इस वर्ष लगभग 22 लाख 70 हजार छात्रों ने NEET परीक्षा दी। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि वर्षों की मेहनत, कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये खर्च करने और कठिन तैयारी के बाद भी यदि परीक्षा की गोपनीयता सुरक्षित नहीं रह पाती, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
“कोटा, दिल्ली, इलाहाबाद, देहरादून में पढ़ाई… फिर भी भविष्य असुरक्षित”अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए बैंक से कर्ज लेकर राजस्थान के कोटा, दिल्ली, इलाहाबाद, देहरादून जैसे बड़े शहरों में महंगी कोचिंग दिलाते हैं। कई छात्र लगातार 3 से 4 वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक युवा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी परीक्षाएं सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से आयोजित हो सकती हैं, तो NEET और अन्य परीक्षाओं में बार-बार लीक कैसे हो रहे हैं।सीकर कनेक्शन और राजनीतिक आरोपों से बढ़ा विवादपेपर लीक मामलों में राजस्थान के सीकर क्षेत्र का नाम लगातार सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा माफिया और राजनीतिक संरक्षण के कारण ऐसी घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं।कुछ मामलों में राजनीतिक नेताओं के नाम सामने आने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को घेरना शुरू कर दिया है। हालांकि संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच जारी है और कई आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।“दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो”
— छात्रों की मांगछात्र संगठनों और अभिभावकों ने मांग की है कि पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल गिरफ्तारी या जांच पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी परीक्षा माफिया सिस्टम से खिलवाड़ न कर सके।छात्रों का कहना है कि CBSE बोर्ड और अन्य परीक्षाओं में मेहनत से अच्छे अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों का मनोबल भी टूट रहा है। यदि मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं होगी, तो प्रतिभाशाली युवाओं का विश्वास व्यवस्था से उठ जाएगा।शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ता अविश्वासविशेषज्ञों का मानना है
कि लगातार हो रहे पेपर लीक केवल परीक्षा प्रणाली की कमजोरी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी बड़ा सवाल हैं। युवाओं का कहना है कि देश में राष्ट्रवाद और विश्वगुरु बनने की बातों के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य के लिए ठोस ब्लूप्रिंट भी जरूरी है।आज देश का नौजवान सड़कों पर है और उसकी सबसे बड़ी मांग है — निष्पक्ष परीक्षा, पारदर्शी व्यवस्था और मेहनत का सम्मान। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो यह आक्रोश आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
