बहुउद्देशीय शिविर बना शिकायतों का मंच—स्कूलों में शिक्षक गायब, अस्पताल बिना डॉक्टर, सड़क-पानी पर भी उठे बड़े सवाल गंगाड़ में फूटा जनाक्रोश:

उत्तरकाशी/मोरी (संवाददाता):मोरी विकासखंड के सुदूरवर्ती गंगाड़ क्षेत्र में शनिवार को आयोजित बहुउद्देशीय शिविर समाधान कम और जनाक्रोश का बड़ा मंच बन गया। जिलाधिकारी प्रशांत कुमार की मौजूदगी में ओसला, पवाणी, गंगाड़ और ढाटमीर सहित कई गांवों के ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं की बदहाली पर खुलकर नाराजगी जताई।ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि क्षेत्र में सरकारी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं।

गंगाड़ के जूनियर हाईस्कूल और हाईस्कूल में शिक्षकों की भारी कमी के कारण बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। आरोप है कि स्कूल सप्ताह में सिर्फ तीन दिन खुल रहा है, जबकि ओसला गांव में तैनात एक शिक्षक तीन महीने से लापता हैं,

लेकिन विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी बेहद दयनीय बताई गई। गंगाड़ का एलोपैथिक अस्पताल वर्षों से डॉक्टर और फार्मासिस्ट के बिना संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है ।

कि जहां पहले ऑपरेशन तक होते थे, वहां अब सामान्य इलाज के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ रहा है।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही सड़क की गुणवत्ता और मुआवजे को लेकर भी लोगों में भारी आक्रोश दिखा। खुद पुरोला विधायक ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए

“जंगलराज” जैसी स्थिति स्वीकार की, जिस पर ग्रामीणों ने चुनावी राजनीति का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।पेयजल संकट ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। जल जीवन मिशन के बावजूद गांवों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। ग्राम प्रधान पवाणी यशपाल ने कहा कि क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन पानी के अभाव में आग बुझाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

दूरसंचार सेवाओं की बदहाली भी ग्रामीणों की बड़ी समस्या बनी हुई है। नेटवर्क न होने से रोजमर्रा के काम और आपातकालीन सेवाएं तक प्रभावित हो रही हैं, जिससे लोगों में गहरा रोष है।हालांकि जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने सभी संबंधित विभागों को समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए हैं और 12 से 24 अप्रैल तक सांकरी में आधार शिविर लगाने की घोषणा की है।

शिविर के दौरान विभिन्न विभागों के स्टॉल्स का निरीक्षण भी किया गया।❗

बड़ा सवाल:क्या प्रशासन के ये निर्देश जमीनी हकीकत बदल पाएंगे, या चार गांव के ग्रामीण यूं ही बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते रहेंगे ?

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