यमुना घाटी में ‘जलाशय विकास योजना’ को मिली गति, नदियों में छोड़े गए महाशीर व ट्राउट मत्स्य बीज

उत्तरकाशी।जनपद उत्तरकाशी में ‘जलाशय विकास योजना’ के अंतर्गत यमुना नदी सहित अन्य सहायक नदियों में महाशीर एवं ट्राउट प्रजाति के मत्स्य बीजों का संचय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने कार्यक्रम में प्रतिभाग कर नदियों में मत्स्य बीज छोड़े और योजना के महत्व को रेखांकित किया।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार नदियों की जैव विविधता को संरक्षित करने के साथ-साथ मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। महाशीर और ट्राउट जैसी प्रजातियां न केवल नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करती हैं।उन्होंने बताया कि इस पहल से यमुना घाटी क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं और काश्तकारों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग कर आर्थिक गतिविधियों को मजबूत किया जाए।अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि समय-समय पर मत्स्य बीज संचय, प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सहायता के माध्यम से मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, मत्स्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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