यमुना घाटी में सूखा और ओलावृष्टि का कहर, किसानों पर दोहरी मार — प्रभारी मंत्री से लगाई राहत की गुहार

उत्तरकाशी/पुरोला।यमुना घाटी क्षेत्र में विगत दिनों पड़े भीषण सूखे और उसके बाद अचानक हुई अति ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस प्राकृतिक आपदा ने खेतों में खड़ी फसलों के साथ-साथ बाग-बगीचों में लगे फलदार पेड़ों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सेब, नाशपाती, आड़ू और प्लम जैसी नगदी फसलें पूरी तरह तबाह हो गई हैं, जिससे क्षेत्र के किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।किसानों का कहना है कि वर्षभर की मेहनत, बीज, खाद और सिंचाई पर किया गया भारी खर्च एक झटके में बर्बाद हो गया। पहले लंबे समय तक पड़े सूखे ने फसलों की वृद्धि को प्रभावित किया और जैसे-तैसे फसल तैयार हुई ही थी कि अचानक हुई ओलावृष्टि ने सब कुछ नष्ट कर दिया। इस दोहरी मार से अन्नदाता गहरे सदमे और चिंता में है।इस गंभीर स्थिति को देखते हुए यमुना घाटी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और किसानों ने उत्तरकाशी के प्रभारी मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा के क्षेत्र भ्रमण के दौरान उनसे मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने मंत्री को बताया कि किस प्रकार सूखा और ओलावृष्टि ने व्यापक स्तर पर फसल नुकसान किया है और किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है।प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र सर्वे कराया जाए और वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को उचित एवं न्यायसंगत मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही, राहत राशि जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाने की भी अपील की गई ताकि वे इस संकट से उबर सकें।प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस विषय को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित करने की बात कही ताकि जल्द सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाई जा सके।मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस आपदा की घड़ी में उन्हें हर संभव सहायता दी जाएगी।स्थानीय लोगों और किसानों को उम्मीद है कि सरकार शीघ्र ठोस कदम उठाएगी और उन्हें इस संकट से राहत दिलाएगी।किसान सशक्त होगा, तभी प्रदेश समृद्ध होगा।

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