श्री डिंगाड़ी (सर-बड़ियार), पुरोला/उत्तरकाशी | शनिवारउत्तरकाशी जनपद की दुर्गम पुरोला विधानसभा के दूरस्थ क्षेत्र आठ गांव सर-बड़ियार के डिंगाड़ी में शनिवार को आयोजित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम तिथि को लेकर विवाद के कारण चर्चा में रहा के। 23 से 21 तारीख को आयोजित इस शिविर का सर ग्राम प्रधान एवं पोन्टी क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि सहित दो ग्राम सभाओं के प्रधानों ने बहिष्कार किया।बहिष्कार करने वाले प्रधानों का आरोप था कि गांव में इन दिनों देवी-देवता थाती पूजन का नौ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम चल रहा है।

ऐसे में शासन-प्रशासन को तिथि तय करने में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। उनका कहना था कि इस संबंध में पूर्व में जिला अधिकारी को पत्र लिखकर कार्यक्रम की तिथि बदलने का अनुरोध भी किया गया था।हालांकि, प्रशासन की ओर से इसे जनता और शासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल बताया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य ने की।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एक ही मंच पर उपस्थित रहे, जिससे ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर मिला।कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों ने सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, पुल निर्माण, डाकघर, मोबाइल नेटवर्क, गेस्ट हाउस तथा आधार कार्ड से जुड़ी समस्याओं सहित कई बुनियादी मुद्दों पर शिकायतें दर्ज कराईं। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य और नेटवर्क जैसी मूलभूत मांगें वर्षों से लंबित हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हो पाया है।ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने संबंधित विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक योजनाओं और सुविधाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनसंवाद कार्यक्रमों का उद्देश्य यही है कि समस्याएं केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर समाधान दिखाई दे।जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि पुरानी लंबित समस्याओं की समीक्षा कर एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रत्येक शिकायत का फॉलो-अप रिपोर्ट तैयार करने और आवश्यकता पड़ने पर स्थल निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए।कार्यक्रम में कुछ ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही।
इस संबंध में ग्राम प्रधान जसवीर सिंह ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रम के चलते ग्रामीण व्यस्त थे, जिसके कारण वे शामिल नहीं हो सके।जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम की तिथि पूर्व में प्रचारित-प्रसारित की जा चुकी थी, लेकिन जो ग्राम पंचायतें किसी कारणवश शामिल नहीं हो पाईं, उनके लिए मार्च माह में सर-बड़ियार क्षेत्र में पुनः एक विशेष जनसुनवाई शिविर आयोजित किया जाएगा।
इस आश्वासन के बाद सर गांव के प्रधान और पोन्टी गांव की प्रधान ने जिला अधिकारी का धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, तहसीलदार पुरोला, खंड विकास अधिकारी पुरोला, डीएफओ बड़कोट, उप जिला अस्पताल प्रभारी पुरोला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय विधायक एवं मंडल अध्यक्ष उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर यह कार्यक्रम प्रशासन की सक्रियता और जवाबदेही को दर्शाने वाला रहा, वहीं तिथि विवाद के कारण उत्पन्न स्थिति ने यह भी संकेत दिया कि दुर्गम क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यक्रम तय करते समय स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का ध्यान रखना आवश्यक है। मार्च में प्रस्तावित विशेष शिविर अब सर-बड़ियार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
