विकास के नाम पर खुली उत्तराखंड की “पहले विकसित विधानसभा” की पोल: विषयों की अपूर्णता से छात्र परेशान, उग्र आंदोलन की चेतावनी बर्फिया लाल जुवांठा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पुरोला का मामला।

पुरोला (उत्तरकाशी)।उत्तराखंड की तथाकथित “पहले विकसित विधानसभा” कहे जाने वाले पुरोला क्षेत्र में उच्च शिक्षा की स्थिति विकास के दावों की हकीकत बयां कर रही है। बर्फिया लाल जुवांठा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पुरोला में वर्षों से महत्वपूर्ण विषयों का पूर्ण संचालन न होने से छात्र–छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर छात्रसंघ ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। ⚠️

🎓छात्रों का कहना है कि विकास के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर महाविद्यालय में आवश्यक विषयों का संचालन तक सुनिश्चित नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार विषयों के संचालन के आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। छात्रों ने कहा कि यदि समय रहते इन विषयों को पूर्ण रूप से संचालित करने की दिशा में प्रयास किए गए होते तो आज आंदोलन की नौबत नहीं आती।

📚बर्फिया लाल जुवांठा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पुरोला विधानसभा क्षेत्र में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, जहां मोरी और नौगांव विकासखंड सहित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए आते हैं। लंबे समय से विषयों की कमी के कारण विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विषय नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है।

🏫छात्रों के अनुसार स्नातक स्तर पर भूगोल, संस्कृत, चित्रकला और गृहविज्ञान विषय पूर्ण रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं, जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, शिक्षा शास्त्र, समाजशास्त्र के साथ-साथ भौतिक विज्ञान और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय आज भी अधूरे हैं। विषयों के अभाव में कई छात्रों को मजबूरी में अन्य विषय चुनने पड़ रहे हैं या फिर उच्च शिक्षा के लिए बाहरी शहरों का रुख करना पड़ रहा है।

🚶‍♂️🎓छात्रसंघ अध्यक्ष गोविंद सिंह चौहान ने बताया कि विषयों की स्वीकृति और संचालन को लेकर कई बार शासन और विभाग को ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उचित कदम नहीं उठाए तो छात्रसंघ छात्र–छात्राओं और अभिभावकों के साथ मिलकर महाविद्यालय परिसर में उग्र आंदोलन करेगा।

✊छात्रसंघ उपाध्यक्ष सलौनी राठौर, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रीतिक चुनार तथा पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षा चन्द्रकान्ता रावत ने भी सरकार से शीघ्र विषय स्वीकृत करने और नियमित संचालन सुनिश्चित करने की मांग की।इस दौरान छात्र प्रतिनिधि आयुष कुमार, समीर, अनिला चौहान, वंदना, दीपिका रावत, अंजली, गौतम पंवार, शिवांश रावत, महेश पंवार, महादेव कंडियाल, यशवंत सिंह, प्रमोद राणा, ईरेश चौहान तथा निशंक ने एक स्वर में कहा कि विषयों की अपूर्णता की समस्या अत्यंत गंभीर है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर पड़ रहा है।

📖पूर्व छात्र नेताओं ने बताया कि पूर्व में भी कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया गया, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। छात्रों ने मांग की है कि महाविद्यालय में सभी स्वीकृत विषयों का संचालन शीघ्र शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का अवसर मिल सके।

🎓उधर, महाविद्यालय के प्राचार्य ए. के. तिवारी ने बताया कि महाविद्यालय स्तर से सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, जो वर्तमान में शासन स्तर पर लंबित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीघ्र स्वीकृति मिलने पर विद्यार्थियों को राहत मिलेगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द विषयों का संचालन शुरू नहीं हुआ तो पहाड़ के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए पलायन करने को मजबूर होना पड़ेगा, जो क्षेत्र के विकास दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। 🔎

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