देहरादून (संवाददाता):उत्तराखंड शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही पदोन्नति प्रक्रिया की धीमी रफ्तार एक बार फिर चर्चा में है। हालात यह हैं कि हजारों शिक्षक अपने पूरे सेवा काल में पदोन्नति का इंतजार करते-करते सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उन्हें उनका हक नहीं मिल सका।यह केवल शिक्षकों की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
हर वर्ष शिक्षक उम्मीद करते हैं कि इस बार उनके अनुभव और समर्पण को सम्मान मिलेगा, लेकिन नीतिगत शिथिलता, प्रशासनिक उदासीनता और जटिल प्रक्रियाएं उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देती हैं।
🔸 राजधानी में भी हालात गंभीरस्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजधानी देहरादून में ही प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के 169 स्वीकृत पदों में से 116 पद रिक्त हैं। जब राजधानी का यह हाल है, तो प्रदेश के दूरस्थ जिलों की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है।
🔸 नेतृत्व के अभाव में प्रभावित हो रही शिक्षाविद्यालयों में प्रशासनिक नेतृत्व की कमी का सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है। बिना प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के विद्यालयों का संचालन प्रभावित हो रहा है।🔸 पदोन्नति से जुड़ा आत्मसम्मान का सवालपदोन्नति केवल वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि शिक्षक के आत्मसम्मान, प्रेरणा और कार्यक्षमता से जुड़ी होती है। जब कोई शिक्षक वर्षों तक सेवा देने के बाद भी उसी पद पर सेवानिवृत्त होता है, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता को उजागर करता है।
🔸 समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया की जरूरतविशेषज्ञों और शिक्षक संगठनों का मानना है कि पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और नियमित बनाया जाना चाहिए। साथ ही, रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए ठोस नीति बनाई जानी आवश्यक है।
❗ बड़ा सवाल:क्या शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देगा, या फिर आने वाले वर्षों में भी शिक्षक पदोन्नति की प्रतीक्षा करते हुए ही सेवानिवृत्त होते रहेंगे?
🔹 शिक्षक संघ की अपील:राजकीय शिक्षक संघ देहरादून ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए सरकार से इस मुद्दे पर शीघ्र ठोस कार्रवाई की मांग की है।
