पुरोला क्षेत्र में सिंचाई नहरों की मरम्मत को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि नहरों के लिए लाखों रुपये का बजट स्वीकृत हो रहा है, लेकिन धरातल पर केवल लिपाई-पुताई जैसे कार्य ही दिखाई दे रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर पिछले वर्ष भी पुरानी नहरों पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन इस वर्ष पुनः उन्हीं नहरों के लिए अलग मद से बजट स्वीकृत कर फिर से कार्य किए जाने की तैयारी की जा रही है। इससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
📌 अधिकारी मौके पर नहीं, काम “भगवान भरोसे”किसानों का आरोप है कि सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता नियमित रूप से साइट पर नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे कार्यों की निगरानी नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप कार्य मनमाने तरीके से किए जा रहे हैं।
📌 “बजट आता है, लेकिन काम नहीं दिखता”किसानों का कहना है कि हर वर्ष बजट तो स्वीकृत होता है, लेकिन उसका उपयोग केवल औपचारिक कार्यों में सीमित रह जाता है। वास्तविक सुधार कार्य नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।
📌 छोटे ‘गूल’ उपेक्षित, सैकड़ों नालियों की खेती प्रभावितग्रामीणों का कहना है कि गांवों के छोटे-छोटे ‘गूल’ (सिंचाई नालियां), जिनसे सैकड़ों नाली भूमि सिंचित होती है, पूरी तरह उपेक्षित हैं। कई स्थानों पर इन ‘गूल’ के हेड क्षतिग्रस्त या समाप्त हो चुके हैं, लेकिन उनके लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया जा रहा है।
📌 जिलाधिकारी को भी भेजा गया पत्रकिसानों ने इस संबंध में जिलाधिकारी को भी पत्र प्रेषित कर समस्या से अवगत कराया है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।–
-🟨 बड़ा सवाल:क्या सिंचाई बजट का उपयोग केवल कागजी कार्यों तक सीमित रह गया है?–
-🔻 निष्कर्ष:यदि नहरों की वास्तविक मरम्मत और छोटे सिंचाई स्रोतों के सुधार पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में किसानों की खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। आवश्यकता है कि संबंधित विभाग जमीनी स्तर पर पारदर्शी और प्रभावी कार्य सुनिश्चित करें, ताकि किसानों को वास्तविक राहत मिल सके।-
