नदी-नालों में जेसीबी का बढ़ता दखल: वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग समाधान के बिना ‘सुरक्षा’ अधूरी ।

उत्तरकाशी।पर्वतीय क्षेत्रों में विकास कार्यों के तहत नदी-नालों में जेसीबी मशीनों का बढ़ता उपयोग अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि तकनीकी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

खेतों और आवासीय भवनों की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही सुरक्षा दीवारें तब तक प्रभावी नहीं हो सकतीं, जब तक उन्हें वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग दृष्टिकोण से समग्र योजना के तहत न बनाया जाए।विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में अधिकतर स्थानों पर केवल रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) खड़ी कर दी जाती है,

जबकि नदी-नालों के प्राकृतिक प्रवाह, तलछट (sediment) और जल वेग (flow velocity) को नियंत्रित करने के उपाय नहीं किए जाते। यही कारण है कि समय के साथ नदी-नालों की गहराई (bed erosion) बढ़ती जाती है और दीवारों की नींव कमजोर होकर गिरने का खतरा पैदा हो जाता है।

🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण: कैसे बचाई जा सकती है कृषि भूमिवैज्ञानिकों का मानना है कि नदी-नालों के प्रबंधन में “कैचमेंट ट्रीटमेंट” और “सेडिमेंट कंट्रोल” सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अंतर्गत—ऊपरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे चेक डैम बनाकर पानी के वेग को कम किया जाएगैबियन स्ट्रक्चर (लोहे की जाली में भरे पत्थर) लगाकर मिट्टी कटाव रोका जाएढाल वाले क्षेत्रों में घास और पौधारोपण (bio-engineering) से मिट्टी को बांधा जाएजल प्रवाह को एक दिशा में नियंत्रित करने के लिए स्पर (spurs) लगाए जाएंइन उपायों से न केवल नदी-नालों की गहराई नियंत्रित रहती है, बल्कि आसपास की कृषि भूमि का कटाव भी रुकता है।

🏗️ इंजीनियरिंग एंगल: केवल दीवार नहीं, पूरी प्रणाली जरूरीसिविल इंजीनियरों का कहना है कि किसी भी सुरक्षा दीवार की मजबूती उसके “फाउंडेशन सपोर्ट सिस्टम” पर निर्भर करती है। इसके लिए—हर 40–50 मीटर पर चेक डैम बनाना जरूरी है, ताकि पानी का वेग टूटेदीवार के पीछे और नीचे ब्लॉक फिलिंग और स्टोन पिचिंग की जाएटो प्रोटेक्शन (Toe Wall) देकर नींव को कटाव से बचाया जाएनदी के मोड़ों (bends) पर विशेष रिवेटमेंट डिजाइन लागू किया जाएयदि ये उपाय नहीं किए जाते, तो करोड़ों की लागत से बनी दीवारें भी कुछ वर्षों में ध्वस्त हो सकती हैं।

⚠️ जेसीबी संचालन पर उठते सवालस्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर जेसीबी के जरिए बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़कर नदी की प्राकृतिक संरचना से छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे जल प्रवाह और अधिक अनियंत्रित हो रहा है। इससे भविष्य में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा और बढ़ सकता है।

📢 जिम्मेदारी तय करने की मांगजनता ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और खनन विभाग से मांग की है कि—बिना वैज्ञानिक योजना के कार्यों पर रोक लगेतकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में ही निर्माण कार्य होंनदी-नालों में अनियंत्रित जेसीबी संचालन पर सख्ती से नियंत्रण किया जाएनिष्कर्षविशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल “दीवार खड़ी करना” समाधान नहीं है, बल्कि नदी-नालों के लिए एक समग्र (integrated) और वैज्ञानिक योजना जरूरी है। अन्यथा, विकास के नाम पर हो रहे ये कार्य भविष्य में विनाश का कारण बन सकते हैं।

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