उत्तरकाशी, 19 जुलाई 2025चुनाव में लापरवाह और पक्षपाती कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी : जनता और समाजसेवी संगठनों ने उठाई आवाज ।

उत्तरकाशी, 19 जुलाई 2025चुनाव में लापरवाह और पक्षपाती कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी : जनता और समाजसेवी संगठनों ने उठाई आवाजउत्तरकाशी

जिले में पंचायत चुनाव के दौरान प्रशासन भले ही निष्पक्षता और पारदर्शिता के दावे कर रहा हो, मगर जमीनी स्तर पर कई जगहों से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ कर्मचारी गुपचुप तरीके से राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।लोकतंत्र की गरिमा के लिए यह अत्यंत गंभीर और निंदनीय है।

🔍 चुनाव के समय कर्मचारियों की भूमिका और नियमावली :भारत सरकार व उत्तराखंड राज्य सरकार की कर्मचारी सेवा नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार नहीं कर सकता, न ही किसी प्रकार से उसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन कर सकता है।इसके अतिरिक्त भारत निर्वाचन आयोग की चुनाव आचार संहिता भी इस विषय में स्पष्ट निर्देश देती है

किकोई सरकारी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग नहीं कर सकता।किसी दल विशेष के पक्ष में कोई कार्य नहीं कर सकता।यदि कोई ऐसा करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित है।—

⚖️ ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान :

1️⃣ प्रारंभिक जांच गठित।

2️⃣ दोषी पाए जाने पर तत्काल निलंबन (Suspension)।

3️⃣ गंभीर प्रकरण में चार्जशीट और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई।

4️⃣ नौकरी से बर्खास्तगी तक का प्रावधान।

—🚨 क्यों जरूरी है चुनाव के समय निष्पक्षता?

✅ लोकतंत्र की नींव निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों पर टिकी है।

✅ यदि कोई कर्मचारी अपने सरकारी दायित्व से भटककर किसी प्रत्याशी को लाभ पहुंचाए तो प्रशासन की साख और जन विश्वास दोनों प्रभावित होते हैं।

✅ निष्पक्ष कर्मचारी ही जनता के भरोसे को मजबूत करते हैं।—

📌 जनता और समाजसेवियों की स्पष्ट मांग :जनपद उत्तरकाशी में कई समाजसेवी संगठनों व जागरूक नागरिकों ने मांग उठाई है कि जो भी कर्मचारी चुनावी कार्य में लापरवाही या राजनीतिक पक्षधरता करता पाया जाए, उसके खिलाफ तत्काल निलंबन और कठोर कार्रवाई हो।चुनाव के दौरान शराब, पैसा या अन्य प्रलोभनों के जरिये वोट प्रभावित करने में किसी कर्मचारी की भूमिका पाई जाती है तो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।—

✍️ जनता की राय :> “यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी नेता के प्रचार में लगा हो या कर्तव्यों में लापरवाही करे तो उसे तत्काल सस्पेंड किया जाए। ऐसे समय में लापरवाही लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है। कठोर कार्यवाही से ही अन्य कर्मचारियों में अनुशासन का संदेश जाएगा।”—

🛑 प्रशासन के लिए चेतावनी भरा सबक जरूरी :चुनाव के समय ऐसे मामलों पर तुरंत सख्त कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत करना बेहद जरूरी है, ताकि अन्य कर्मचारी भी यह समझें कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है। यदि कर्मचारी अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन नहीं करेगा तो सस्पेंशन और नौकरी से बाहर होने से बच नहीं सकेगा।—

📢 समाचार के माध्यम से संदेश :

“लोकतंत्र की नींव ईमानदारी और निष्पक्षता पर टिकी है। चुनाव के समय लापरवाह और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए।”—

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